Sunday, April 14, 2024

भगवान दास शर्मा "प्रशांत"

*शीर्षक :मां*

मां तुम ही हो शक्ति स्वरूपा,
सम्पूर्ण सृजन आधार हो।
तुमसे ही है घर की शोभा,
करुणा वात्सल्य अवतार हो।।

बच्चों की तुम प्रथम शिक्षिका,
बच्चों के हित अड़ जाती हो।
तभी तुम कहलाती जगत में,
बच्चों की पालक औ रक्षिका।।

प्रतिमूर्ति हो सहनशील की,
सब तकलीफे सह लेती हो।
लोगों की खुशियों की खातिर,
चुपके से तुम सह लेती हो।।

प्रेम समर्पण भाव में डूबी, करुणामयी बन जाती हो। जब भी आता कठिन समय तो,
धैर्यवान धरा बन जाती हो।।

अपने बच्चों की खातिर तुम,
मौत से भी लड़ जाती  हो।
सदाचार मूल्यों की पोषक,
बच्चों को सदमार्ग दिखाती हो।।

मां धरणी जैसा है रूप तेरा,
बन क्षमाशील सह जाती हो,
 मन मे नहि रखती बैर द्वेष,
सदा सबकी प्रिय बन जाती हो।।

मां तुम जैसा दूजा नहि कोई,
नश्वर इस सकल संसार में।
ईश्वर की अद्भुत रचना मां,
सकल सृष्टि सृजन के सार में।।

भगवान दास शर्मा "प्रशांत"
इटावा उत्तर प्रदेश दूरभाष: 9457097 599 
ईमेल: bhagwandas.das@rediffmail.com

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