Sunday, April 14, 2024

श्रीमती हासीरानी बैनर्जी

" माँ "                   

जननी जन्म भूमिश्च, 
                  स्वगधपि गरियसी, 

माँ है तो हम है, 
             माँ नहीं तो हम नहीं। 

भूमि है तो अन्न है, 
              भूमि नहीं तो अन्न नहीं। 

माँ गया, काशी, वृन्दावन है, 
      माँ ही शिक्षा, धर्म, कर्म, मर्म है। 

माँ प्यारी माँ न्यारी, 
                  माँ ही पवित्रता है। 

माँ ही शीतल,सरल, स्वच्छन्द है, 
      माँ ही सुबह, शाम, आनंद है। 

माँ ने हमें धर्म का पाठ पढ़ाया, 
 
माँ ही तो जीने का रास्ता दिखाया। 

मातृ दर्शन से दुख दुर हो जाता है, 

 मातृ दर्शन से सभी तीर्थ हो जाता है। 

माँ शक्ति साधन हमारी, 
     माँ ही तो है संसार सारी।

      रचयिता -श्रीमती हासीरानी बैनर्जी 
      सहायक शिक्षिका 
      आश्रम शाला परसदा खुर्द 
      विकास खंड छुरा 
     जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़

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