Sunday, April 14, 2024

श्री मती ज्योति किरण चंद्राकर

माँ
कितनी ममतामयी होती है मां ।
अपनी हर गम छिपा लेती है मा।
धरती सी सहनशील।
अंबर सी विशाल होती है मां।
 त्याग ,बलिदान ,समर्पण की मूर्ति है मां। 

अपनी संतानों के लिए हर कुछ अर्पण करती है मां ।
सबसे बड़ी पथप्रदर्शक है मां ।
जीवन के सारे दुख हारती है मां ।
कितनी ममतामयी होती है मां ।
अपनी हर गम छिपा लेती है मां ।

© श्री मती ज्योति किरण चंद्राकर 

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