Sunday, April 14, 2024

शिल्पी मजूमदार

याद आती है मां
तुम कहा चली गई हो माँ 
तुम्हारी बहोत याद आती है माँ ।
पता नही ये एक एक पल
कैसे बीते तुम्हारे बाद
तुम्हारे साथ हंसना, रोना
तुम्हारा डांटना, तुम्हारा समझाना
बहुत याद आता है माँ ।।
कितना वक्त हो गया तुम्हे देखा नही,
तुमसे मिली नही, हाथो से खिलाया नहीं
सबकुछ बहुत याद आता है माँ ।
मुझे याद है तुम्हारा संघर्ष
कैसे तुमने काटा एक एक वर्ष
पापा के जाने के बाद
तुमने हमे कैसे बड़ा किया
सबकुछ बहुत याद आता है माँ ।
रिश्तों का पाठ तुमने पढ़ाया,
दुनियादारी तुमने समझाया
उठना ,बैठना ,कहना, सुनना,
सब तुम्हिने तो सिखाया ।
अब दो पल बांटने को तुम हो नही
तुम कहा चली गई हो माँ
तुम्हारी बहुत याद आती है माँ । 

✍️
शिल्पी मजूमदार

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