Monday, April 15, 2024

अमिता अनुत्तरा

मुझे अच्छा नहीं लगता
मेरी मां की उमर का बढ़ना 
अब मैं बूढ़ी हो रही हूं न 
उसका ये कहना 
मुझे अच्छा नहीं लगता ।
सूरज से पहले 
अम्मा को उठते देखा है 
पूजा की थाली , कंकू रोरी
रामायण की चौपाई
मैंने तो अम्मा में ही देखा है ,
लेकिन झटके से मेरी अम्मा 
अब उठ भी ना पाती है 
जब सहलाती है अम्मा 
अपना दर्द भरा घुटना 
मुझे अच्छा नहीं लगता ।
मेरी मां की उमर का बढ़ना 
मुझे अच्छा नहीं लगता।।
चंदा की शीतलता को मैने तो 
अपनी अम्मा के हाथों में पाया है 
दुनिया की चालाकी में 
कैसे अपनी जगह बनाऊं 
अम्मा ने बातों ही बातों में 
समझाया है ,
सुख में ,दुख में रहने की 
अब तो आदत सी हो गई है 
लेकिन अम्मा बिन तेरे रहना 
मुझे अच्छा नहीं लगता ,
मेरी मां की उमर का बढ़ना 
मुझे अच्छा नहीं लगता।।
                    अमिता अनुत्तरा

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