Sunday, April 7, 2024

कमल पटेल

*(वो तो मेरी मां है)*
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चंद दिनों पहले,
मुझसे पूछा गया सवाल।
जब जवाब ढूंढा मैंने तो,
मैं तो हो गया निहाल।।
जीवन में कोई हुआ सहाई,
जो तुम्हारी यादों में 'जमा' है?
बहुत गहराई से सोचा मैंने,
उत्तर मिला, वो तो मेरी मां है।(१)

इस धरा पर लाया मुझको,
अपनी गोदी में खिलाया मुझको।
गीले बिस्तर में खुद सो कर,
सूखे में सुलाया मुझको।।
जिसका हर पल मेरी चिंता में ,
आज तक गुज़रा है, वो तो मेरी मां है।(२)

समाज में रहना है कैसे,
मां ने है सिखलाया।
सदाचार मानवता क्या है,
मां ने है बतलाया।।
पिता के सामने बन अधिवक्ता,
मुझको अपना अधिकार दिलाया‌‌।
जिसकी ममता की पूंजी, 
मेरी खुशियों के लिए जमा है।।
मैं गर्व से कहता हूं, हां वो तो मेरी मां है।(३)

चाहे जननी मां हो, या धरती मां,
दोनों ने खूब दुलार किया।
कर सकूं जीव मात्र की सेवा,
इस हेतु तैयार किया।।
स्वयं कष्ट उठाकर मुझको,
दिया उन्मुक्त आसमां है।
बड़े गर्व के साथ कहता हूं ,
वो तो मेरी मां है।।(४)

स्वरचित-
कमल पटेल चकरावदा
उज्जैन (मध्य प्रदेश)

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