Wednesday, April 10, 2024

कल्पना कमल

माँ और ममता
जमाने मे ममता कि क़ीमत ना होती, 
अगर माँ न होती, अगर माँ न होती। 

धर के उदर नौ माह संभाला,
जन्म से पहले माँ ने है पाला 
काया कि कोई वरियत न होती, 
अगर माँ न होती, अगर माँ न होती।

खून का अपने दूध बनाके 
हमको पिलाया हृदय से लगा के 
साँसो कि कोई हकीकत न होती 
अगर माँ न होती, अगर माँ न होती।

खुद भूखी रहकर, हमको खिलाया 
निंद्रा है त्यागी, हमको सुलाया 
कल्पना कमल कि शिनाखत ना होती 
अगर माँ न होती, अगर माँ ना होती।

© कल्पना कमल 

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अनिल पांचाल सेवक

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