माँ
माँ सबसे बड़ी है जग मे ममता के मोती लुटाये
चाहे लाल को जग ठुकराये माँ गले लगाए
धर के अपने तन मे, नौ माह का भर उठाया है
खून का दूध बनाकर, माँ ने हमको पिलाया
बचपन मे ऊँगली पकड़ कर, हमको चलना सिखाया
ज़ब भी दुख दर्द हुआ है, आंचल मे माँ ने छिपाया।
क्या भला और क्या बुरा है, माँ ही हमको समझाये
चाहे लाल को जग ठुकराये, माँ गले लगाए।
खुद भूखी भी रहकर, माँ प्यार से हमको खिलाती
त्याग के अपनी निंद्रा, सुख चैन से हमको सुलाती
ज़ब भी बेचैन हुए हम, माँ कि आँखे भर आती
हर रिश्ते नाते जग मे, पहले माँ ही समझाती।
यीशु और राम, मोहम्मद, गुरु गोविन्द माँ ने जनमाये
चाहे लाल को जग ठुकराये, माँ गले लगाए।।
माँ कि सेवा का पल, पल भर भी तुम ना गवाना
टुकराया जो तुमने माँ को, तुमको ठुकराये जमाना
हर रिश्ते बन जायेंगे दोबारा, ये बात नहीं बिसराना
माँ दुनिया छोड़ गई तो, मुश्किल है दोबारा पाना
माँ कि ममता कि कीमत, ईश्वर भी 'कमल 'न दें पाए।
चाहे लाल को जग ठुकराये, माँ गले लगाए ।।
© रामचन्द्र कमल
No comments:
Post a Comment