Wednesday, April 10, 2024

वर्षा शिवांशिका

शीर्षक:-  जन्मदात्री-माँ,
उठाकर गोद में सहलाया माँ, 
चूमकर गालों को लाड-लड़ाया माँ ।
लालन-पालन पोषण किया माँ।

बोली-वाणी में नाद भरी रूपहला माँ,
ह्रदय-से लोरी सुनाई,बहलाया माँ।
घुटनों से रेंगते, पैरों से चलना सिखलाया माँ।

बिगड़ी किस्मत को संवारा  माँ,
हँस कर , कष्ट सहती आपरा  माँ। 
बदले में कुछ नचाहे सहारा  माँ।

बड़ी न कोई रूपा निराला  माँ, 
मेरा मंदिर–मेरा शिवाला माँ।।
कोई न केवल तुम्हीं उजियाला माँ।

वात्सल्य,प्रेम की सागर तू माँ,
ममता की जीवित मूरत तू माँ।
करूणामयी ज्यों कुदरत  तू  माँ,।

ईश्वर का रूप, चारों धामों का फल है माँ,
बड़े भाग्यशली है वे,ज्यों आँचल है माँ।
सेवा-भक्ति करना उसकी, निर्मल है माँ।

वन्दनीय होती है माँ ,
पूज्यनीय होती है मॉ,
मॉ सचमुच होती है माँ।

वर्षा शिवांशिका 
कुवैत

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