कर ले मां की बंदगी
कर ले इस कदर तू मां की बंदगी।
कि संवर जाए तेरी यह जिन्दगी।
राम जी ने सिर्फ जननी को ही नहीं,
सौतेली माताओं को भी दिया मान।
दिया हृदय में अपनी मां का ही स्थान।
नौ मास नौ दिन गर्भ में तुझे पाला।
मृत्यु से लड़कर फिर बाहर निकाला।
खिलाया अपने हिस्से का एक- एक निवाला।
महसूस नहीं होने दिया तुझे अपना दिवाला।
तू न सुन सके कराह, दे रखा जुंबा पे ताला।
तेरी विपदा को नित रौद्र रुप पकड़ टाला।
तेरे सुख के लिए स्वयं को चट्टान बना डाला।
सीने से चिपका कहती मेरे नयनतारा, मेरे लाला।
जप तू सदा उस मां के नाम की माला।
छंट जाएगा विपत्ति का बादल काला।
टूट जाएगा संकट रूपी मकड़ी का जाला।
कर जाएगा पार सारे दुःख रूपी नदी - नाला।
जीवन का स्वर्ग है चरणों में मां के।
बस जा तू उन्हीं चरणों में ही जा के।
हो जाएगा धन्य मां का आशीष पा के।
रचयिता -श्रीमती सुमा मण्डल
वार्ड क्रमांक 14 पी व्ही 116
नगर पंचायत पखांजूर
जिला कांकेर छत्तीसगढ़
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