" मेरा अभिमान मेरी मां "
मां ........
एक शब्द में समाहित मेरा सारा संसार,
स्नेहिल, गरिमामयी, उत्कृष्ट ,
ममता की मूरत .........
क्या कहूं , हर शब्द छोटा है ,
मेरी मां के आगे..........
प्यारी सी भोली मुस्कान ,
सबके लिए दिल में सम्मान ,
ममता से भरी हुई ,
अपने बच्चों की है शान ,
यही तो है मेरी मां की पहचान .........
तन्हाई में उसकी याद ,
आज भी रुला देती है ,
जब नींद ना आए ,
उसकी थपकी झट सुला देती है ,
जाने कैसे पहचान लेती है ,
हमारी परेशानी ............
परियों की तरह झट,सुलझा भी देती है
सबके लिए इतना प्यार ,
जाने कहां से लाती है ,
अपने लिए उसकी झोली ,
हमेशा छोटी पड़ जाती है ,
हमारी जन्नत, हमारी मन्नत ,
हमारी पूरी दुनिया है वो ,
चारों धाम हमारी , सारे तीरथ है वो ,
भगवान से पहले , मेरी मां है मेरे लिए ,
जान है हमारी ,
पूरा जहान है वो मेरे लिए ,
यही दुआ है हर जन्म ,
मेरी मां की ही गोद मिले,
बन पाऊँ मैं उनके जैसी ,
शायद ऐसा मौका मिले...........!!!
स्वरचित
प्रणीता प्रभात
फरीदाबाद , हरियाणा
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