शीर्षक - मेरी प्यारी मां -
भोर होती जिसकी मीठी आवाज से,
रात होती शुरू सर को सिरहाते हाथ से,
मेरे जीवन के हर पल को "आनंद" से भरती,
मेरी प्यारी मां ।
मेरे दुखों का हो जाता उसको गहरा एहसास,
लगती भूख मुझको उससे पहले तैयार पकवान थाल में,
खिलाती अपना प्यार भरकर बड़े चाव से हरबार,
मेरी प्यारी मां ।
चाहती बदले में कुछ कभी भी ना मुझसे,
मेरे लिए प्रार्थना करती प्रभु से बार-बार वो,
बन जाती मेरी ढाल, मुसीबत कोई भी आए रहती मेरे साथ साथ,
मेरी प्यारी मां ।
सफल हो जाऊं मैं अपना जग में नाम बनाऊं,
पीछे सारी मेहनत दिन - रात करती बिना रुके,
जीवन में आने वाली चुनौतियों के लिए मुझको तैयार करती,
मेरी प्यारी मां ।
चोट लगती कभी मुझको अपना दर्द दिल में छुपाती,
ले मुस्कुराहट जीवन की हार को अपनाना सिखाती,
यकीन रखो अपनी मेहनत पर, वक्त पर करो ऐतबार कहती,
मेरी प्यारी मां ।
भेद ना करती कोई भी छोटा हो या बड़ा,
सब बच्चों को एक जैसा प्यार देती,
मिलजुल कर जीवन में एक डोर में रहना तुम सब कहती,
मेरी प्यारी मां ।
कर्म जीवन का पहला है परोपकार,
महत्वाकांक्षा को कभी न देना तुम अपने जीवन में कोई अधिकार,
अच्छा नागरिक बन देश की समय-समय पर करना सेवा सिखाती,
मेरी प्यारी मां।
ममतामयी रूप हैं ईश्वर का साक्षात धरती पर,
कोई लिख ना सकेगा पूरी अपनी कविता उस पर,
शब्द भी कम पड़ जाएंगे उसकी महिमा को गाकर,
मेरी प्यारी मां ।
- मोनिका डागा "आनंद" , चेन्नई, तमिलनाडु 🙏❤️🙏
आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद !💕
रचना ( स्वरचित व सर्वाधिकार सुरक्षित) ✍️
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