Saturday, April 13, 2024

अलका बालियान

माँ एक वरदान 
जीवन का वरदान लिए,
आशा की उड़ान लिए,  
करूणा का सागर लिए,  
समर्पण,स्नेह, त्याग की गागर लिए, 
चट्टान-सा धैर्य लिए,
शिखर-सा माधुर्य लिए,
धरती-सी प्रकृति लिए,
विश्वास की नीव लिए,
आँचल में सुख की छाँव लिए,
माता जीजा, गुजरी, पन्ना, अहिल्या बाई-सी
जीवन न्यौछावर करती है माँ | 
वर्तमान में असंख्य कौशल लिए,
घर और बाहर की जिम्मेदारी सँभालती है माँ ||
ईश्वर का अनुपम,अलौकिक आशीर्वाद लिए,
हर बालक के लिए अपरिहार्य है माँ ||
हर बालक के लिए अपरिहार्य है माँ ||

-अलका बालियान (आणंद) गुजरात 
-लेखिका (शिक्षिका)

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