माँ, मेरी प्यारी माँ ,
सरल ,सहज ,सुंदर थी , मेरी माँ ,
महीने के 30 दिन में 15 दिन तो वो,व्रत ही करती । कभी पिता जी की लंबी उम्र के लिए तो कभी भाई के लम्बी उम्र के लिए
जन्म देने वाली मेरी माँ के लिए
कभी किसी ने लम्बी उम्र का व्रत नहीं किया ।
शायद यही कारण की वे हमसे दूर चली गई ।
भगवान तो थी ही इसलिए अपने धाम लौट गई। मेरी माँ ,बहुत भोली थी ।
सब पर विश्वास जल्दी कर लेती थी पर .....
हमे कोई कुछ कह तो दे तो माँ जो है
अम्बे गौरी बन जाती थी ।
जब भी मै देखती माँ बेटियों की जोड़ी, उनके मध्य होने वाली बातों की मैं कल्पना मात्र कर लेती .. त्यौहार में रौनक माँ के बनाये पकवान से होते है
जिनके पास माँ है वो धनवान होते है।
माँ दुआ करती है, आशीष देती है।
माँ का आँचल, आसमान सा होता है ।
माँ का होना, इस धरा में भगवान का होना होता है ।।
रचनाकार-
© श्रीमती अचला मिश्रा ,
धरसींवा 36 गढ़
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