Sunday, April 7, 2024

डॉ तुलेश्वरी धुरंधर

कहाँ मै तुमको खोजूं माई
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कहाँ मैं खोजू तुमको माई कहाँ मैं तुमको खोजू ।

तेरे ममता के छाँव में माई बढ़ी पली और खेली हूँ।

कहाँ मैं ढूंढूं तुमको माई।2

1. मायके सुना हो गया, तेरे बिन मेरी माई।
इधर उधर से आके माई ,मुझको आवाज देगी। 
माई से मिल गले लगूंगी ,सोच के मैं रह जाती।
कहाँ मैं तुमको खोजू माई।
2, सभी अपने में भूले बैठे ,अब कौन  मझे है पूछे।
 छलनी हुवे जैसे मन लागे ,कौन पीड़ा मेरा  सुने।
 कहाँ मैं तुमको खोजें माई।2
3, जब जब बीमार पड़ी बचपन मे, रात रात भर जागी।
किस्सा कहानी, लोरी सुनाके प्यार से मुझे सुलाई।
कौन सुनाए लोरी अब कौन सुनाए कहानी।
कहाँ मैं तुमको
4 काकी बड़ी मामी मौसी में
झलक तुम्हारी खोजूं।
कौन मुझे ममता से सुलाये
और कौन मुझे दे आशीष ।
कहाँ मैं तुमको खोजूं माई
कहाँ मैं तुमको ढूंढूं माई, 
कहाँ खो गई मेरी माई।
कहाँ मैं तुमको खोजूं।
रचनाकार-डॉ तुलेश्वरी धुरंधर, अर्जुनी,बालौदाबाजार,(छत्तीसगढ़)

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