मां
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मां जननी है हम सब की
इस भू धरा पर और इस संसार में।
मां दयानिधान है दुःख हर्ता है
अपने लाल और पालनहार के
मां समस्त दुःखों की निवारणीय है
मां ममत्व का अपार भण्डार है
घर आंगन में खुशहाली है
जब घर मां का मान समान है
उन घरों में हमेशा खुशहाली रहती है
जिन घरों में प्यार बांटती है।
मां के लिए न कोई छोटा न कोई बड़ा
मां तो सिर्फ और सिर्फ मां होती है
भूपेन्द्र कण्डारी
(चमोली उत्तराखंड)
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