💐माँ 💐8,4,024
दुनिया में सच्चे प्यार की मूरत मां बिन कोई नहीं ।
मां का सीधा अर्थ ही ममता प्यार स्नेह का रूप वही ।। धृ।।
बचपन में बाल रूप मेरा ,माता संगोपन किया ।
नौ महीने निज शरीर संग, मां ने ही पालन खुद किया ।
जन्म दिया संस्कारों से, उपकार दूसरा कोई नहीं।।१।।
मां का********
उम्र बढे गुरु बन माता ने, अच्छा बुरा भी सिखलाया ।
कुल और देश का नाम करो ,
रोशन ,भी उसने पढवाया।
खानपान का ध्यान हमारा,मां
बिन कौन करे कोई।।२।।
मां का******
माता बिना जगदीश्वर भी,रह गया अधूरा ईश्वर लोक।
अवतारण दुर्गा मां शक्ति ,करने सुरक्षा फिर सब लोक।
धरणि का दुख दूर किया, शक्ति अवतार विजय माई।।
मां का*********
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रचनाकार_विजय डांगे,नागपुर
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