शीर्षक "मां"
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01,03,2024,
मां है ईश्वर का अनुपम उपहार,
सृष्टि का प्रावधान,प्रथम,मुरार,
माता एकाधार में प्रथम,गुरू,
घर-परिवार करे स्वर्णिम-संसार। ।
मां होती अन्नपूर्णा,सरस्वती का
भी रूप,भार्या,सुता,बहन एक,
सही दिनचर्या से करे श्रीगणेश
पूजा,अर्चना,खान-पान, आवेश।।
मां बाल का सर्वांगीण विकास,
हेतु तिलाजंलि कर देती,सुख,
पति,सास,ससुर का देखभाल,
महारत सर्व विधि,विधान,मृणाल।।
जब शेष रह जाता समय कुछ,
सदुपयोग करती स्व देखभाल,
फिर भी बचे तो करे समाजिक-
कार्य का भी विधिवत,ध्यान,एकैक।।
मां है निःस्वार्थ सेवा का नाम,
इसका ॠण चुकाना,कठीन-
कार्य,एक जनम तो क्या लेना-
होगा सात जन्म कि हो रिॠण।।
प्रेषिका
श्रीमती अरुणा अग्रवाल
लोरमी, जिला मुंगेली, छ, ग,
संपर्क: 9981830087
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